तुम्हारा हमसे रुठना जरुरी था
रिश्तों का टुटना जरुरी था ।
तुम्हारी याद में मेरा रोना जरुरी था
मौत कि चादर ओढ़े चिताह पर सोना जरुरी था ।
चरित्र पर जो लगें हैं दाग उसे साफ करना जरुरी था
तुम्हारा हमे माफ़ करना जरुरी था ।
अपनों के लिए झुकना जरुरी था
निरंतर चलते रहने पर रुकना जरुरी था ।
जिंदगी हसकर जिना जरुरी था
दुखों का गम और गुस्से का जहर पीना जरुरी था ।
गिरने के बाद उठकर संभलना जरुरी था
वक्त और हालातों के साथ ढलना जरुरी था ।
धुप में नंगें पांव चलना जरुरी था
जख्मो पर दवा मलना जरुरी था।
दुखों को सेहना जरुरी था
बिना बोले हमारा आपसे कुछ कहना जरुरी था।
-gaurav singh