जब याद आई तुम्हारी

।। कहना चाहता हूँ बहुत कुछ ।।
“आज मन लग रहा था भारी
जब याद आई तुम्हारी “
” कैसे बताऊं शब्दों को बातों में
बस जी रहा हूं तुम्हारी यादों में”
जब भी याद आती है तुम्हारी आजाता है जुबान पर तुम्हारा नाम
बरसात के इस मौसम में एक शाम को बैठकर पी रहा हूं जाम ।
….कैहना चाहता हूं बहुत कुछ….
कैसे बताऊं मैं तुम्हें कि मैं कीतना प्यार करता था तुमसे सच मूच ।

“कैसे बताऊं तुम्हे अपनी गलतियों पर पचता रहा हूं
जिंदगी की मीठी मीठी यादों के सहारे जी रहा हूं ।”

“रखकर अपने दील को साफ कर देना मुझे माफ । ”

“जिंदगी के सफर नहीं है आसान मुश्किलों के साथ है काटना
जिंदगी के गम तुम्हारे साथ ही तो है बांटना ‌।”
बातें तो है कुछ शब्दों के बिना अधूरी “
“कैसे बताऊं तुम्हे जिना चाहता हूं तुम्हारे संग जिंदगी पुरि । “
“जिंदगी में कुछ यादें जाती है छुट
और अब भी कैहना चाहता हूं बहुत कुछ । “

-Gaurav singh

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