सोच समझ मेरी जैसे एकदम रूक जाती है।
मां पापा की याद जब सांसों से जुड़ जाती है।
तब मैं खुद को पाकर भी खो देती हूं।
छिपकर अकेली बच्चों की तरह रो लेती हूं।
खुद मे हिम्मत जुटाई जाती है।
जो खुदा चाहता है वही होता है!
यह बात खुद को समझाई जाती है।
फिर से साहस का जज्बा जगाना पड़ता है।
फिर से आंसुओं को हटाना पड़ता है।
हमे दिखावे के लिए झूठा मुस्कुराना पड़ता है।
@ nahidrajput786