देखो –
पतझड़ की विरह बेला है
पर तुम-
इंतेज़ार करना ऋतुस्वामी बसंत का
पंछी बन –
डाली-डाली चहचाऊंगा जुरूर
हाँ ! मैं आऊंगा जुरूर ;;
पर तुम –
बाहों का आलिंगन तैयार रखना…..
तुम्हारे –
भोले पे चढ़ाए गए बेलपत्र
मेरे लिए –
अनकहे-अनसुने प्रेमपत्र ही तो है
भला –
सती की परिक्षा कब असफल रही
स्वयंभू –
देवादिदेव महादेव स्वयं प्रतीक्षारत रहे
अंहकारी दक्ष की नश्वर सभा में,
मैं शाश्वत बन प्रकट हो जाऊंगा जुरूर
हाँ ! मैं आऊंगा जुरूर……..
पर तुम –
बाहों का आलिंगन तैयार रखना…
निहारो –
अनन्त आकाश को एकटक
सुनो –
विकल अंतर्मन की विरह पीड़ा
धरा की तडपन समझो –
यही है प्रियसी की पीड़ा
मैं –
एकल अम्बर
तुम –
प्यासी धरती
बादलों संग बरस आऊँगा जुरूर
हाँ ! मैं आऊंगा जुरूर……..
पर तुम –
बाहों का आलिंगन तैयार रखना…
©सचिन शर्मा