अगर
दान कर सकता
तो मै जुरूर करता
यह सरकारी नोकरी
ओर
बदल देता समाज मे
सफलता के पैमाने
फिर
दिला पाता सबको
बराबरी का सम्मान
हा !
बचा लेता
उन तमाम लोगों को
जो सामाजिक दृष्टिकोण में
केवल इसीलिए
असफल हैं
क्योकि
वो संघर्षरथ हैं
अपने सपनों के लिए
जो नही कर पाए
समझौता
दो वक्त की रोटी के लिए
©सचिन शर्मा