चाँदनी रात में , हंसी मुलाकात में
वो यूँ कहती चली बात ही बात में
तू दूर मुझसे रहे मैं दूर तुझसे रहूं
क्या मिले आसमां ज़मी किसी कायनात में
चाँदनी रात में-चाँदनी रात में…….😢😢
तू मेरा नूर है मैं तेरा नूर हूँ
तू भी मज़बूर है, मैं भी मज़बूर हूँ
क्या बताऊँ तुझको नज़रबन्द ए ज़ालिम
तन्हा कैसा हूँ मैं , तेरी बारात में
चाँदनी रात में-चाँदनी रात में…….😢😢
क्या तो तूने कहा, क्या तो मैने सुना
रुस्वा तू भी रही,रुस्वा मैं भी रहा
लहरों के बीच में मन की ये कश्तियाँ
क्यों डुबो दी गई आंसूवन की बरसात में
चाँदनी रात में-चाँदनी रात में…….😢😢
तेरे तशगुल में क्या प्यार करना रहा
न तो जीना रहा,न तो मरना रहा
वक्त के घाव का बन के मरहम महज
तेरा दीदार ही हमको सौगात में
चाँदनी रात में-चाँदनी रात में……😢😢
@सचिन शर्मा