माफ करना !तुम्हे प्रिये, मैं वो प्यार नही दे पाऊंगा?

देखो
मेरे जीवन पथ के ये टेढ़े मेढे रास्ते
ईश्वर चाहकर भी सीधे न बना पाया होगा
शायद
वो भी विवश होगा निठुर नियति के आगे
मेरे हाथों में लकीरें तो ह पर
न उभरी न उजली
ओर
सर्पाकार विषैली कुंडली मे पाषाण बने बैठे
सम्पूर्ण ग्रह स्वामी
मुझे जीवन यात्रा की यातनाओं का अग्रिम बोध कराने के लिए ही विद्यमान है
इस पर भी तुम मुझे मन में बसा बैठी हो
ओर दिल दे बैठी हो
नही नही नही
मैं ये जड़ जगत का घोर कलंकित पाप नही पर पाऊंगा
माफ करना मुझे प्रिये !
तुम्हे – मैं प्यार नही दे पाऊँगा !!

लाचार जिम्मेदारियों के बोझ की थकन
नही देख पाऊँगा तुम्हारे नीर भरे नयन,,
ज़माने से गिला मुझे हर इक इक बात का
क्या मोल चुका पाऊंगा मैं
तुम्हारे स्नेह युक्त जज़्बात का,,
कँटीले रास्तों पर मेरा आवा-गमन
क्या फूल बिछा पाऊंगा तुम्हारे आगमन,,
भला स्वयं दुःख भरा उजड़ा सा वन
कैसे सजा पाऊंगा तुम्हरे सुख का उपवन,,
तुम सजोगी संवरोगी बनोगी पल पल
मैं एक दरख़्त हूँ अनवरत बेज़ार सा,,
लटों की ओट लिए जब निहारोंगी टक टक
मैं किस्मत का मारा दिखता रहूँगा बेज़ान सा,,
तुम चंचल चपल चंद्र सी कलाओं में निपुण
मैं फकत रिक्त बंजर ज़मी सा निर्गुण ,,

मैं मर कर भी तुम्हारे लिए – स्वर्ग का द्वार नही बन पाऊँगा😢
मैं अश्क़ों का कंठाभरण विजयी हार नही दे पाऊँगा😢
तुम्हारे निर्मल पावन प्रेमी मन का-
यूँ गला घोंट नही पाऊंगा😢
माफ करना मुझे प्रिये !
तुम्हे – मैं प्यार नही दे पाऊँगा !!

©सचिन शर्मा

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