केदारनाथ

केदारनाथ जा रहा हूँ मैं
वहीं मांगूंगा उनसे वह शक्ति
जो बिना सती के
सदा शंकर ने
विधि के विधान को
यथावत रखते हुए
व्यथित मन से
सम्पूर्ण खालीपन में भी
लोक आचरण में विलीन हुए बिना
लोककल्याण के कार्य को
अविरत संपादित किया…..

जो आशुतोष शिव ओढ़रदानी
सृष्टिकर्ता स्वयं महाकाल
सहते सहज वियोग का भार
होकर योगलीन –
करते प्रतीक्षा,धीरज धर –
अपने प्रिय की चिरकाल
यह देख आत्मबल पा रहा हूँ मैं
केदारनाथ जा रहा हूँ मैं…
@सचिन

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