कवि ,
न बना जा सकता है
न ही बनाया जा सकता है
ये केवल अवतरित हो सकते है
विलसित महलों में नही
वरन
निर्वासित मिट्टी के आंगन में
जहाँ
वर्षों तक अघोषित -अनवरत
कर्म तप किए जा रहे हों
कवि,
ईश्वर की वो सुंदर रचना है
गर भक्ति मार्ग प्रस्थ करे
तो लौकिक होते हुए भी
पारलौकिकता
का अनुभव बोध करा सकती है
तुलसीदास, कबीर,मीरा,
कालिदास, सूरदास,इत्यादि
इसके उदाहण मात्र है…
@सचिन शर्मा