तेरा एहसास



लिखने को तो एक दिन में तुझ पर पुरी किताब लिख दूँ
लेकिन जब भी कलम उठाती हूँ
कभी आँखे नम होती है
कभी चेहरे पे मुस्कुराहट आती है
लिखना चाहूँ तुझ पर तो भी नही लिख पाती
तेरे लिए मेरे अल्फाज भी कम पड़ जाते है ,,जो मुझे मायुस कर जाते है
लिखना शुरू ही किया था कि फिर तेरी याद आई
आंसुओ की बरसात हुई
न चाहते हुये भी खुद को लाचार बेबस बना बैठी
और जी भर कर उसे याद किया बेहिसाब डायरी के पन्नो को खराब किया
अब थोड़ा सुकून मिला
शायद दिल का दर्द कम हुआ
तू है लाजमी तू है खास तो कैसे ना लिखूँ तूझपे गजल खास
हाँ!मुकददर में ना सही
मेरे एहसासों मे तो तुम हो
तो मै हर बार लिखूगी कहानी तुझपे खास
तेरा चेहरा बड़ा दिलकश था
मै उसके अलावा कुछ सोच नही पाती हूँ
वो तेरा मुस्कुराना ,,गालों पर पड़ता वो निशान
उफ!जैसे आसमा में दामिनी हो खिली
तुम इजहार की बात करते हो
मै तुम्हे देखते-देखते नही थकी थी
क्या उर्दू क्या हिन्दी हर भाषा के शब्दो में तेरी तारीफ करूँ
तुम हो उस सावन की घटा की तरह
जो आती तो कभी कभी है
मगर खुशियाँ बेहिसाब दे जाती है ।

writer __ANITAROHLAN

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