रेत की तरह फिसलते वक्त से मैंने पूछा
लौटा दो एक बार जो छूट गया
वो कहने लगा मुझे बांध कर रख सकती हो क्या
मैं समय हूं जैसे बहता पानी
हर शख़्स की है कुछ पूरी कुछ अधूरी कहानी
ना रुका हूं मैं ना रुकूंगा
तुम जब भी भटकोगे
बस हक़ीक़त ही कहूंगा
रेत की तरह फिसलते वक्त से मैंने पूछा
लौटा दो एक बार जो छूट गया
वो कहने लगा मुझे बांध कर रख सकती हो क्या
मैं समय हूं जैसे बहता पानी
हर शख़्स की है कुछ पूरी कुछ अधूरी कहानी
ना रुका हूं मैं ना रुकूंगा
तुम जब भी भटकोगे
बस हक़ीक़त ही कहूंगा