प्रतिबिम्ब



दिल चाहता है मैं तुझे अपना आसमान बनाऊँ,
उड़ सकूं जहाँ पंख फैलाकर वह आधार बनाऊँ,
बन जाए तू सागर मैं लहर तेरी बन जाऊँ,
बन जाए तू जमीन मेरी,
इस कदर मैं समाऊँ तुझमें मैं तेरी प्रतिबिम्ब बन जाऊँ।

तू जो देखे ख्वाब ख्वाबों में मैं ही नजर आऊँ,
तू दिल मेरा मैं धड़कन तेरी बन जाऊँ,
तेरी बगिया का मैं फूल बन जाऊँ ,
देखे जो आइना तू तो मैं नजर आऊँ,
इस कदर मैं समाऊं तुझमे मैं तेरी प्रतिबिम्ब बन जाऊँ ।
श्वेता दूहन देशवाल

Leave a comment