पीड़ा

इस संसार के हर मानव के,

हृदय में भरी है अनंत पीड़ा ;

जिस पर जा सकता एक महाकाव्य लिखा।

दीनों के हृदय में बन चुकी है जो हलचल क्रीड़ा,

गा सकता है प्रत्येक मनुष्य वीणा को लेकर

संगीत की भांति इनकी पीड़ा।

इस संसार के हर मानव के हृदय में भरी है अनंत पीड़ा ,

दरिद्रता से हो गई है आज गरीबों की दुर्दशा;

कोई दूर नही कर पा रहा इनकी यह व्यथा।

-payal jaiswal

Leave a comment